तपती सड़क पर भूखें, प्यासे, बीमार, कमजोर, बेबस अप्रवासी मजदूर बूढ़े, बच्चें, औरतों की दास्तान
"मुझे किसी भी स्पेशल ट्रेन की जानकारी नहीं है. इतने दिनों बाद मैंने पैदल ही जाने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि मैं दिल्ली में नहीं मरना चाहता हूं, मैं अपने गांव जाकर मरना चाहता हूं.”
यह दिल्ली से पैदल यूपी के लिए निकले एक मजदूर का बयान है, जिसे एएनआई ने प्रसारित किया है. भारत का अनाज भंडार जरूरत से तीन गुना ज्यादा भरा है. लोग इसलिए भाग रहे हैं कि कहीं भूख से मर न जाएं! जिन्होंने नई फसलें तैयार कर दी हैं, उन्हीं के बच्चे शहरों से इसलिए भाग रहे हैं कि भूख से मर न जाएं.
"मुझे किसी भी स्पेशल ट्रेन की जानकारी नहीं है. इतने दिनों बाद मैंने पैदल ही जाने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि मैं दिल्ली में नहीं मरना चाहता हूं, मैं अपने गांव जाकर मरना चाहता हूं.”
यह दिल्ली से पैदल यूपी के लिए निकले एक मजदूर का बयान है, जिसे एएनआई ने प्रसारित किया है. भारत का अनाज भंडार जरूरत से तीन गुना ज्यादा भरा है. लोग इसलिए भाग रहे हैं कि कहीं भूख से मर न जाएं! जिन्होंने नई फसलें तैयार कर दी हैं, उन्हीं के बच्चे शहरों से इसलिए भाग रहे हैं कि भूख से मर न जाएं.
